सेवा जोहार दोस्तों
आजकी चर्चा में हमारा विषय है हमारा नेता कैसा हो जी हां दोस्तों आपने बिल्कुल सही पढ़ा हमारा नेता कैसा हो । वर्तमान की जो स्थितियां है उनको ध्यान में रखते हुए मुझे ये लगा कि एक इस विषय पर भी जानकारी दी जाए
दोस्तों आपके विचार इससे भिन्न हो सकते हैं में इन बातों पर जोर नहीं दूंगा कि आप इसी बात पर सहमत हो में बस इतना चाहूंगा कि मेरे द्वारा जिन बिंदुओं पर प्रकाश डाला जाता है आप उन बिंदुओं पर स्वयं विचारे फिर अपनी राय प्रदान करे।
हमारा नेता कैसा हो
हमारे जो भी बिंदु है उनको हम कुछ स्थानों पर उदाहरण सहित समझते चलेंगे जिससे हमें बिंदुओं को समझने मैं आसानी हो
हमारा पहला बिंदु है
शिक्षा
जी हां आपने सही पढ़ा शिक्षा एक नेता के लिए शिक्षा उतनी ही जरूरी है जितना एक कंप्यूटर ऑपरेटर को कंप्यूटर के बारे मैं पढ़ना । बाबा साहब ने सही ही कहा है कि शिक्षा शेरनी का वो दूध है जो पियेगा वो दहाड़ेंगे हम दो सामाजिक व्यक्तियों की तुलना करते हैं दो नेता है एक 10 वी पास है पर पैसा बहुत सारा है और जबकि दूसरा किसी बड़े स्तर के कॉलेज से सामाजिक विषयों पर शोध करके डिग्री धारक है । अब आपसे सवाल है कि ज्यादा ज्ञान किसके पास पास होगा दसवीं पास मैं या फिर बड़ी संस्था से डिग्री धारक के पास। आप सोचिए उस समाज के विकास हेतु 10 पास व्यक्ति अच्छा कार्य कर पाएगा या फिर वो व्यक्ति अच्छा कार्य कर पाएगा जिसने उस समाज के ऊपर अध्ययन किया है। जाहिर है डिग्री धारक अच्छे से नेतृत्व कर पाएगा इसका जवाब आप हमें कॉमेंट्स करके बताए
दूसरा बिंदु है
व्यवहार
हमारा दूसरा बिंदु है। व्यवहार जब हम चुनाव में नेता का चुनाव करे तब हम इस बिंदु पर भी ध्यान दें कि जिसे हम चुन रहे हैं उसका व्यवहार कैसा है क्या वाकई वो हर किसी को सम्मान की नजर से देखता है। या फिर ऐसा ना हो कि हम चुनाव जीतने के बाद नेता जी के पास किसी समस्या को लेकर जाए और नेता जी का जवाब तारीख पे तारीख आए या फिर नेता जी का सेक्रेटरी मिलने से ही रोक लगा दे।
अगला बिंदु है
संचार कौशल का प्रभाव

ये बहुत महत्वपूर्ण बिंदु है अक्सर देखा जाता है कि कुछ नेताओं की बोली भाषा नकारात्मक होती है जो बात बात मैं अपशब्दों का प्रयोग करते हैं । या फिर नकारात्मक शब्दों का प्रयोग करते हैं या फिर हमारी समस्याओं को सामने वाले पक्ष के समक्ष प्रभावी रूप से नहीं रख पाते हैं जिससे हमारी समस्याओं का समाधान नही हो पाता है अक्सर यही होता है हम हमारी समस्याओं को लेकर हमारे चुने हुए नेता के पास जाते हैं और उनसे उम्मीद करते हैं कि वो हमारी समस्याओं को आगे तक ले कर जाएं पर हमारे द्वारा चुना हुआ नेता संचार कौशल में कमजोर या फिर सरल शब्दों में कहे तो सामने वाले को हमारी समस्या सही तरीके से नहीं बता पाता जिससे हमारी समस्या हल ही नहीं हो पाती है
अगला बिंदु है
तर्क वितर्क शक्ति
नेता का जब हम चुनाव करें तब हम इस बारे में अवश्य ध्यान दें कि उसकी तर्क शक्ति कैसी है किसी समस्या को लेकर उसके क्या तर्क आते हैं। किसी विषय को लेकर तर्क वितर्क करता है या फिर बस फैसला सुना दिया कि नहीं ऐसा होता आया है तो बस यही होना चाहिए या फिर किसी विषय के बारे में बगैर सोच विचार के अपना निर्णय ले लें
अगला बिंदु है
पद की गरिमा
ये एक बहुत ही मुख्य बिंदु हे जिसके अपवाद या फिर इसके विपरीत काम करते आपको आपके आस पास बहुत सारे नेता मिल जाएंगे । चुनाव जीतने से पहले नेता अपनी इतनी साफ छवि बनाता हे कि जनता उसके दाग देख ही नहीं पाती है। अक्सर होता यह है कि हम जिसे चुनते हैं चुनाव जीतने के बाद हमारे आशियाने को उजाड़ने मैं उसी की अहम भूमिका दिखती है। एक छोटा सा उदाहरण वर्तमान में घटित घटनाओं से लेते हैं
आप सभी को पता है कि आदिवासी क्षेत्रों जहां पांचवीं अनुसूची या पैसा एक्ट लागू है वहां पर कोई बाहरी व्यक्ति बगैर किसी अनुमति के प्रवेश नहीं कर सकता पांचवीं अनुसूची लागू क्षेत्र में पैसा एक्ट लागू क्षेत्र में समस्त संसाधनों पर क्षेत्रीय लोगों का अधिकार होता है पर अभी वर्तमान में जिन नेताओं को हम चुनते है वहीं नेता कुछ बड़ी कंपनियों के साथ मिलकर जबरन आदिवासी क्षेत्रों मैं दख़लंदाज़ी करते हैं ।
सारांश
ऐसी बहुत सारे बिंदु हैं दोस्तों जिनपर एक ही पोस्ट के माध्यम से प्रकाश डालना संभव नहीं है। ये एक बहुत छोटी सी कोशिश थी मेरी हो सकता शायद आपको मेरी पोस्ट पसंद आई हो
पोस्ट के आखिर मे मैं बस आपसे यही कहूंगा जब चुनाव की बारी आए तो हम एक कुशल निपुण प्रभावकारी , तार्किक, सदाचारी शिक्षित नेता का का चुनाव करें । जो हमारे हित मैं काम करे ना कि अपना पेट भरे