🌍 विश्व की सभी भाषाओं की जननी — गोंडी भाषा 🇮🇳

गोंडी भाषा सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि मानव सभ्यता की आदिम आवाज़ है।
यह वही भाषा है जो उस समय अस्तित्व में थी जब दुनिया में लेखन, लिपि और संस्कृति की शुरुआत भी नहीं हुई थी।
गोंडी भाषा का इतिहास
गोंडी भाषा मध्य भारत के गोंडवाना क्षेत्र से उत्पन्न हुई — जो आज के महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और ओडिशा तक फैला है।
पुरातत्वविदों और भाषा विशेषज्ञों के अनुसार, गोंडी भाषा द्रविड़ भाषा परिवार की सबसे प्राचीन शाखा है।
कई विद्वानों का मत है कि संस्कृत, पाली, प्राकृत जैसी भाषाएँ भी बाद में इसी द्रविड़ीय भाषा प्रवाह से विकसित हुईं।
🪶 गोंडी भाषा की विशेषताएँ
इसकी शब्दावली में प्रकृति, संस्कृति और आत्मा का गहरा संबंध मिलता है।
हर शब्द का अर्थ पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से जुड़ा हुआ है।
यह भाषा ध्वनि आधारित है, जिसका उच्चारण प्रकृति की ध्वनियों से मेल खाता है।
गोंडी लिपि, जिसे गोंडी लिपि (Gunjala Gondi script) कहा जाता है, हजारों वर्ष पुरानी और पूरी तरह वैज्ञानिक है।
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गोंडी भाषा – सभ्यता की जननी क्यों?
क्योंकि गोंडी भाषा उस काल से जुड़ी है जब मनुष्य ने सबसे पहले बोलना सीखा था।
प्रकृति पूजा, टोटेम परंपरा, प्रतीक संस्कृति — ये सब गोंडी सभ्यता से विश्वभर में फैले।
इसलिए कई भाषाविद गोंडी को मानव जाति की पहली भाषा मानते हैं, जिससे बाद की भाषाएँ जन्मीं।
🔥 गौरव की बात यह है कि –
आज भी करोड़ों लोग गोंडी भाषा बोलते हैं।
यह न केवल एक आदिवासी पहचान है, बल्कि मानवता की जड़ है।
गोंडी भाषा हमें याद दिलाती है कि हमारी संस्कृति, हमारी मातृभाषा ही असली “विश्वभाषा” है।
✊ जय जोहार! जय गोंडवाना! जय गोंडी भाषा
✍️ लेखक: किशोरदादा वरखडे