बुड़ालपेन सुमरनी पाटा
टेक :-आरती हो रही हो बुढादेव सतरंगी ध्वजा लहराय
कौन मढ़ा तेरो ठाना कौन है पूजन हार
कौन करत है तेरी सुमरनी कों करे गुणगान
सुमरनी ……
साजामढ़ा है तेरो ठाना, कोया पूजन हार
लिंगो करत है तेरी सुमरनी ,कोयतूर पूजन हार
सुमरनी ……
दिव्यशक्ति बड़ादेव है ,जगत नियंता देव
कोया मूरी दीप में ,शंभू भये महादेव
सुमरनी …..
कलि कंकाली जंगो दाई ,महाशक्ति वरदान
तैंतीस कोट के देवता ,महिमा करे बखान
सुमरनी ……
अगाधि अनादी देव है ,भेद नहीं कोई पाए
प्रकृति शक्ति बड़ादेव है ,कोया जन ध्यान लगाये
सुमरनी ……
साल साज में सात्विक पूजा ,फिर महुआ मैं आये
रार होम कोया फूल चढ़ावे सुख सम्पति घर आये
सुमरनी …..
दिन रविवार है पूजन वारा पांच कलस है जलाए
कोयावंशी करे सुमरनी ,संकट हो जा सहाए
सुमरनी …..